top of page

क्या आपकी कीमत सही है? छोटे व्यापार के लिए मूल्य निर्धारण की पूरी गाइड

अपडेट करने की तारीख: 10 नव॰

The Price is Right... Or Is It? Your Complete Guide to Pricing Strategies for Small Business; omemy.com

हमेशा की तरह, एक कहानी से शुरू करते हैं!


नेहा अपने छोटे से स्टूडियो में खड़ी थी, चारों तरफ रंग-बिरंगे हाथ से पेंट किए बैग बिखरे थे। दो साल से वह विज्ञापन एजेंसी में काम करती थी, साथ ही अपने शौक को जिंदा रखे हुए थी। पिछले महीने उसने नौकरी छोड़ दी और "Neha's Canvas" शुरू किया।

फैसला सही लग रहा था। Instagram पर 12,000 फॉलोअर्स थे। दोस्त कहते, "तुम इतनी प्रतिभाशाली हो!" छह महीने की बचत थी। गलत क्या हो सकता था?


सब कुछ।


तीन हफ्ते पहले दुकान खोली। कीमतें उचित लगीं – हाथ से पेंट किए बैग ₹1,200/-। हिसाब सरल था: कपड़ा ₹200, पेंट ₹100, प्लस समय। लोग समझेंगे! वेबसाइट पर 2,847 विज़िट। सैकड़ों लाइक्स और "बहुत सुंदर!" टिप्पणियाँ।

कुल बिक्री? तीन। वो भी दोस्तों को।


जब तारीफें खूब मिलें, पर पैसे नहीं

"दीदी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा," नेहा ने अपनी बड़ी बहन मीरा से video call पर कहा। मीरा chartered accountant थी। "लोग मेरे designs को इतना पसंद करते हैं। Posts share भी करते हैं। पर खरीदता कोई नहीं। लगता है लोग handmade चीज़ों की कद्र ही नहीं करते!"

मीरा ने एक भौं उठाई। "या फिर तुझे pricing की ABC नहीं पता। बता, ₹1,200 कैसे तय किया?"

"अरे वो तो आसान है ना। कपड़ा ₹200, paint ₹100, यानी ₹300 खर्चा। Bag बनाने में 4-5 घंटे लगते हैं। तो मैंने सोचा अपने समय के ₹900 fair हैं। Total ₹1,200।"

"अच्छा! और वो camera जो तुमने photos खींचने के लिए खरीदा? Laptop? Internet connection? Packing के डिब्बे? Website का खर्चा? Instagram पर ads चलाने का पैसा? Electricity का bill? और हाँ, तुमने ये भी देखा कि वैसे ही bags बाज़ार में कितने में बिक रहे हैं?"

नेहा का आत्मविश्वास धड़ाम से गिर गया। "मैंने... मैंने तो ये सब सोचा ही नहीं। हाँ, एक designer brand देखा था जो ₹4,500 में बेच रहा था, तो मुझे लगा मेरे ₹1,200 तो बहुत reasonable हैं।"

मीरा ने एक लंबी साँस ली। "नेहा, सुन। कीमत लगाना कोई दिल की बात नहीं, दिमाग की बात है। रणनीति चाहिए। और तूने एक बहुत बड़ी गलती की है – बिना सोचे-समझे कीमत लगा दी। ये नहीं सोचा कि वो कीमत तेरे business के लिए, तेरे खर्चे के लिए, और बाज़ार में तेरी जगह के लिए सही भी है या नहीं!"

"रुक... रणनीति? मतलब एक से ज्यादा तरीके हैं?" नेहा ने अपनी notebook निकाल ली। "मुझे तो लगता था बस खर्चा निकालो और अपना मुनाफा जोड़ दो - बस!"

"ओहो मेरी artist बहन," मीरा हंसी, "अब तुझे pricing की असली दुनिया दिखाती हूँ। चाय बना और आराम से बैठ - लंबी कहानी है।"


कीमत लगाने की रणनीतियाँ - आखिर हैं क्या?

"देख," मीरा ने अपना laptop खोलते हुए कहा, "pricing strategy मतलब सिर्फ एक number नहीं है। ये है क्यों तू वो कीमत लगा रही है और कैसे तू उस पर पहुंची। और ये तेरा business बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है।"

"समझ ऐसे - जैसे तेरे पास अलग-अलग औज़ार हों। Hammer कीलों के लिए perfect है पर screw के लिए बेकार। वैसे ही हर pricing strategy कुछ हालात में धमाल मचाती है और कुछ में बुरी तरह fail हो जाती है।"

नेहा ने notes लेने के लिए notebook खोल ली।

"चल, सबसे basic से शुरू करते हैं।"


रणनीति #1: खर्चा जोड़ो तरीका - (Cost Plus Pricing) – सरल पर सीमित

"सबसे सरल तरीका," मीरा ने समझाया, "खर्चा निकालो, मुनाफा जोड़ो, बस!"

Formula: कुल खर्चा + मुनाफा = कीमत

"बिल्कुल सीधा तरीका है। तुझे पता है सब कुछ में कितना खर्चा आया, उसमें 30-50% मुनाफा जोड़ दिया, हो गया। कोई झंझट नहीं।"

कब काम आता है?

  • जब बहुत छोटा, part-time business हो

  • जब जान-पहचान वाले ग्राहक हों (जैसे अपने मोहल्ले के लोग)

  • जब हर order अलग हो

  • जब प्रतिस्पर्धा (competition) ज्यादा ना हो

"जैसे तेरे मोहल्ले की tailor ब्लाउज़ ₹300 में सिलती है - ₹150 कपड़ा, ₹20 धागा-सुई, ₹130 अपनी मेहनत। सरल ! या electrician ₹500 प्रति विज़िट लेता है plus सामान - वो भी यही तरीका है।"

"पर ध्यान से सुन, नेहा," मीरा गंभीर हो गई। "ये तरीका सिर्फ छोटे, part-time business के लिए ठीक है। जैसे ही तू बड़ा business करने लगी या असली competition face करने लगी, ये तरीका पानी में गया!"


बड़े business के लिए ये तरीका क्यों fail होता है:

  1. बाज़ार की हकीकत नज़रअंदाज़ करता है: तेरा calculator ₹1,200 बोले तो जरूरी नहीं ग्राहक भी ₹1,200 दे। हो सकता है बाज़ार में ₹800 ही मिलता हो, या फिर ₹2,000 भी मिल सकता हो!

  2. पैसे छूट जाते हैं: अगर लोग खुशी-खुशी ₹1,200 दे रहे हैं तो शायद तू कम ले रही है। ₹1,500 या ₹1,800 भी मिल सकते थे!

  3. Competition को अनदेखा करता है: तू अपनी दुनिया में कीमत लगा रही है, बाकी लोग क्या कर रहे हैं वो देखे बिना

  4. Brand की value नहीं गिनता: हो सकता है एक पुराना brand ज्यादा ले सके

  5. तेरी गलतियों का bill customer को देता है: अगर तुझे कोई उत्पाद बनाने में 6 घंटे लगते हैं और दूसरों को 4 घंटे, तो क्या ग्राहक को तेरी extra time के पैसे देने चाहिए?


नेहा को थोड़ा बुरा लगा। "तो मेरा ₹1,200 वाला calculation गलत था?"

"Part-time hobby के लिए ठीक था," मीरा ने clear किया। "पर तूने तो job ही छोड़ दी! तुम्हें व्यापार चाहिए, महंगा शौक नहीं।" ये तरीका तेरा starting point है, पर रणनीति नहीं बन सकता।"


रणनीति#2: ऊंचे दाम से शुरू, फिर धीरे-धीरे कम - (Skimming Pricing)

"याद है जब Apple नया iPhone launch करती है?" मीरा ने पूछा। "पहले कीमत आसमान में! फिर 6 महीने बाद धीरे-धीरे नीचे आती है। ये जानबूझकर किया जाता है।"

कब काम आता है?

  • जब कुछ नया, अनोखा हो

  • जब कुछ लोग 'पहले लेने' के लिए extra पैसे देने को तैयार हों

  • जब research and development में लगा पैसा जल्दी वापस चाहिए हो

Examples: नए phone/laptop, किताबें (पहले hardcover फिर paperback), gaming console, नए fashion collection!

"पर ये तभी काम करता है," मीरा ने warning दी, "जब तेरी उत्पाद सच में नई और अलग हो। तू हाथ से paint किए बैग के लिए ये नहीं कर सकती जब सैकड़ों कलाकार वैसे ही बैग बेच रहे हैं!"


रणनीति #3: कम कीमत से शुरू, फिर धीरे-धीरे बढ़ाओ-(Penetration Pricing)

"इसमें तू जानबूझकर कम कीमत से शुरू करती है ताकि जल्दी ग्राहक आएं, फिर धीरे-धीरे बढ़ाती जाती है। जैसे वो नई फोन कंपनी पहले 3 महीने इंटरनेट ₹99 में देती है! या Netflix ने शुरू में बहुत कम सदस्यता कीमत रखी थी।"

नया तरीका: मुफ्त-प्रीमियम (Freemium Pricing)

"और हाँ," मीरा ने जोड़ा, "आजकल एक नया trend चल रहा है - Freemium बोलते हैं। Basic service बिल्कुल मुफ्त, premium features के लिए पैसे लो। जैसे Spotify - मुफ्त में ads, ₹119 दो तो ad-free music। या कैनवा - बुनियादी डिज़ाइन मुफ़्त, पेशेवर सुविधाएँ भुगतान करें । "


पर खतरा भी है!

"छोटे business के लिए ये risky है। तुझे इतना पैसे होना चाहिए कि शुरू में कम मुनाफे पर survive कर सको। याद है माया की कहानी?"

सीख:

  • प्रत्यक्ष लागत: हर इकाई से जुड़ी (कपड़ा, पेंट, डिब्बे)

  • अप्रत्यक्ष लागत: उपरी खर्चे (बिजली, इंटरनेट, उपकरण, विज्ञापन)

  • स्थिर लागत: उत्पादन से नहीं बदलतीं (किराया)

  • परिवर्तनशील लागत: उत्पादन के साथ बढ़ती हैं (सामग्री, भेजना)


रणनीति #4: ऊंची कीमत = ऊंचा दर्जा (Snob / Premium Pricing)

"अब सुन," मीरा मुस्कुराई, "ये दिलचस्प है। कुछ चीज़ों में ऊंची कीमत ही उनकी पहचान होती है।"

"मतलब... ऊंची कीमत ही बेचने का बिंदु है?"

"हाँ! कुछ उत्पादों के लिए अगर तू कीमत कम कर दे, तो लोग कहेंगे नकली है।"

उदाहरण

"एक जौहरी था। फिरोज़ा के आभूषण ₹5,000 में नहीं बिक रहे थे। उसने गलती से ₹15,000 लिख दिए। पूरा stock दिनों में खत्म! क्यों? क्योंकि ₹5,000 पे लोगों ने सोचा नकली है। ₹15,000 पे उन्हें लगा असली और खास है।"

कब काम आता है?

  • जब brand की मजबूत भावनात्मक कीमत हो

  • जब ग्राहक को लगे महंगा = अच्छा

  • जब विशिष्टता चाहिए

  • जब विलासिता, प्रतिष्ठा बेच रहे हो

उदाहरण: Chanel bag, Rolex घड़ी, उच्च-श्रेणी के रेस्तरां, designer आभूषण

"छोटे धंधे के लिए भी काम कर सकता है अगर तू खास लक्ज़री बाज़ार को target करे। पर पूरा package चाहिए - बेहतरीन quality, सुंदर branding, खास अहसास।"


रणनीति #5: मुकाबले को देखो (Competitive Pricing)

"अपनी कीमत प्रतिस्पर्धियों के हिसाब से लगाओ।"

3 तरीके:

  1. उनके बराबर: सबकी औसत कीमत (जैसे petrol pump)

  2. सब से कम: बाज़ार हिस्सा लेने के लिए

  3. सब से ज्यादा: और किसी को प्रतिक्रिया मत दो

"समस्या ये है कि हमेशा दूसरों को देखते रहो, कभी नहीं देखो कि तेरे लिए क्या सही है।


रणनीति #6: मूल्य के हिसाब से कीमत

"इसमें तू कीमत लगाती है इस आधार पर कि ग्राहक कितना मूल्य मानते हैं, ना कि तेरा खर्चा क्या है।"

"उदाहरण: मेरे दफ्तर के पास एक कैफे साधारण कॉफी ₹40 में बेचती है। सामने 5-सितारा होटल में वही कॉफी ₹200 की! फर्क? अनुभव! होटल सिर्फ कॉफी नहीं बेच रहा, पूरा अनुभव बेच रहा है।"

कब काम आता है?

  • जब साफ-साफ दिखा सको तुम्हारी चीज़ अलग कैसे है

  • जब brand की भावनात्मक अपील हो

  • जब उत्पाद कोई समस्या बहुत अच्छे से हल करे

"अपने बैग को कहानी के साथ रखो। हर बैग अनोखा है, सदियों पुरानी परंपराओं से प्रेरित, पेशेवर कलाकार द्वारा हाथ से पेंट किया। अचानक तुम बैग नहीं, व्यक्तित्व और विरासत बेच रहीं हो!"


रणनीति #7: गतिशील मूल्य निर्धारण (Dynamic Pricing)

"मांग, समय, परिस्थितियों के हिसाब से कीमतें बदलो।"

उदाहरण: हवाई कंपनियाँ छुट्टियों में ज्यादा, Uber भीड़ में बढ़ी कीमत, होटल शादी के मौसम में...

"ये system जटिल technology चाहता है। तू सरल संस्करण कर - त्योहारों के थोक आर्डर पे जल्दी छूट, तत्काल अनुरोधों पे extra शुल्क।"


रणनीति #8: मनोवैज्ञानिक मूल्य निर्धारण (Psychological Pricing)

"कीमतें .99 में क्यों खत्म होती हैं? ₹199, ₹200 से सस्ता लगता है!"

उदाहरण:

  • बंडल मूल्य (3 बैग ₹3,200),

  • आकर्षण मूल्य (₹1,999),

  • optical discounting मूल्य (₹2,500 काटा, अब ₹1,800)

"छोटे व्यापार के लिए ये मुख्य रणनीति के साथ जोड़ो। अंतिम स्पर्श है, नींव नहीं।"


"अलग-अलग उद्योग अलग मानदंड अपनाते हैं।"

  • तकनीक: ऊंचा शुरू फिर कम

  • दूरसंचार: कम शुरू फिर बढ़ाओ

  • लक्ज़री: ऊंची कीमत = ऊंचा दर्जा

  • किराना: मुकाबले को देखो

  • सेवाएं: मूल्य देखो

  • हाथ से बना: मिश्रण - जगह पर निर्भर


दो जान-लेवा गलतियाँ

गलती #1: बहुत कम कीमत (धीरे-धीरे मौत)

माया वाला मामला। क्या होता है:

  • ज्यादा मेहनत, कम पैसे

  • Quality नहीं बढ़ा सकते

  • Ads नहीं कर सकते

  • थक जाओगे

  • खुश ग्राहकों के बावजूद धंधा डूबेगा

"माया के पास ग्राहक थे, अच्छी reviews थीं, 12 घंटे काम करती थी... और फिर भी कंगाल! ये है कम कीमत का नतीजा।"

गलती #2: बहुत ज्यादा कीमत (जल्दी मौत)

क्या होता है:

  • कोई नहीं खरीदता

  • पैसे खत्म

  • सामान जमा होता रहता

  • भारी छूट देनी पड़ती

  • धंधा जल्दी खत्म

"फर्क ये है: कम कीमत धीरे-धीरे मारती है जबकि तुम खुद को मार-मारके थक जाते हो। ज्यादा कीमत जल्दी मारती है जबकि तुम उलझन में बैठे रहते हो बीच में।"


अपनी सही कीमत ढूँढना

नेहा की असली लागत

प्रत्यक्ष (प्रति बैग):
कपड़ा ₹200, पेंट ₹100, डिब्बा ₹30, टैग ₹20 = ₹350

अप्रत्यक्ष (महीने की ÷ 20):
लैपटॉप ₹250, कैमरा ₹167, इंटरनेट ₹1,200, 
विज्ञापन ₹3,000, बिजली ₹800, सामान ₹500,
डिब्बे ₹300, परिवहन ₹800 = ₹7,017 ÷ 20 = ₹351

असली लागत: ₹350 + ₹351 = ₹701

न्यूनतम आमदनी: ₹2,000 प्रति बैग

न्यूनतम कीमत: ₹2,701

हकीकत (50% बिक्री): ₹4,701

"₹4,701? ये तो ₹4,500 डिज़ाइनर बैग से भी ज्यादा!"

"इसीलिए रचनात्मक लोग असफल होते हैं। सिर्फ कपड़ा-पेंट गिनते हैं। असली लागतें बहुत ज्यादा हैं।"


नेहा की तबदीली - कदम दर कदम

कदम 1: लागत जान लो ✓असली लागत ₹701 + ₹1,500 कमाई = ₹2,201 न्यूनतम


कदम 2: मुकाबला देखो

  • सस्ते printed बैग : ₹300-600 (तेरा मुकाबला नहीं)

  • स्थानीय कलाकार: ₹800-1,200 (सीधा मुकाबला)

  • पुराने brands: ₹1,800-2,800 (जहाँ तू पहुंचना चाहती है)

  • Designer/luxury: ₹4,000-8,000 (अभी realistic नहीं)


कदम 3: अपनी जगह तय करो

चर्चा के बाद, नेहा को समझ आई: "मैं ₹1,800-2,500 वाली established कलाकार category में हूँ, ₹800-1,200 वाली शुरुआती category में नहीं। पर पहले साबित करना पड़ेगा।"


कदम 4: ग्राहक को समझो

"कौन ₹1,800-2,500 के हाथ से paint किए बैग खरीदता है?" मीरा ने पूछा।

नेहा ने सोचा: "जो लोग कला की कदर करते हैं, अनोखी हाथ से बनी चीज़ें पसंद करते हैं, premium खर्च कर सकते हैं पर ultra-luxury नहीं। वो कला प्रदर्शनियों, छोटी दुकानों, design मेलों, जागरूक lifestyle brands में खरीदारी करते हैं।"


कदम 5: योजना चुनना - मूल्य के हिसाब से + विकास योजना

महीना 1-3: भरोसा बनाओ

  • कीमत: ₹1,499 प्रति बैग

  • योजना: थोड़ा कम रखो portfolio बनाने के लिए

  • ध्यान: Reviews और testimonials लेना

  • मुनाफा:₹798 प्रति बैग

  • लक्ष्य: 15 बैग = ₹11,970 महीने का

महीना 4-6: मूल्य दिखाओ

  • कीमत: ₹1,899 प्रति बैग

  • योजना: मजबूत कहानी सुनाना

  • Extra: अच्छी packing, certificate

  • मुनाफा: ₹1,198 प्रति बैग

  • लक्ष्य: 20 बैग = ₹23,960 महीने का

महीना 7-12: प्रीमियम जगह

  • कीमत: ₹2,299-2,499 प्रति बैग

  • योजना: पूरी value-based

  • Extra: सीमित संस्करण

  • Bundle: 2 बैग, ₹4,200 में

  • मुनाफा: ₹1,598-1,798 प्रति bag

  • लक्ष्य: 22 बैग = ₹35,156-39,556 महीने का


छह महीने बाद - कमाल हो गया!

पहले क्या था:

  • कीमत: ₹1,200

  • बिक्री 3 हफ्तों में: 3 बैग (सिर्फ दोस्तों को)

  • मुनाफा: नकारात्मक (नुकसान!)

  • नेहा की हालत: हारी-थकी, छोड़ने का मन

अब क्या है:

  • कीमत: ₹1,499 से शुरू, महीना 4 तक ₹1,899

  • बिक्री 3 महीनों में: 42 बैग (14 प्रति महीना औसत)

  • मुनाफा पहले 3 महीनों में: ₹33,516

  • 6 महीने बाद: 18-20 बैग महीने में, ₹21,564-23,960 कमा रही है

"ये जादू नहीं है," नेहा ने एक साथी कलाकार को बताया। "ये है पूरी तस्वीर समझना - असली खर्चे, बाज़ार में अपनी जगह, और कौन सी योजना सच में तेरे धंधे के लिए काम करेगी। मैं लगभग छोड़ देती क्योंकि मुझे कुछ समझ नहीं आया - मैं अपने brand के लिए ज्यादा कीमत ले रही थी और अपने असली खर्चों के लिए कम!"


दूसरे उदाहरण

राज का अचार का धंधा: ₹149 प्रति जार, मूल्य के हिसाब से, दादी की 60 साल पुरानी विधि पे ज़ोर

अर्जुन की IT सलाह: Package pricing (बुनियादी ₹15k, पेशेवर ₹35k, उद्यम ₹75k)

प्रिया की घर की बेकरी: मुकाबले से शुरू की, फिर custom cakes के लिए मूल्य-आधारित पे बदली

मीरा की वित्त सलाह: पहले ₹500/घंटा (समय के हिसाब से), फिर ₹15,000 flat प्रति tax return (नतीजों के हिसाब से)

साझा धागा: असली लागत जानो, बाज़ार समझो, सही योजना चुनो, बदलते रहो।


सुनहरे नियम

  1. पहले असली लागत निकालो - सब कुछ गिनो, हर चीज़

  2. खर्च-जोड़ की सीमा समझो - छोटे, अंशकालिक के लिए ठीक, बड़े होने के लिए नहीं

  3. अपनी इंडस्ट्री जानो - हर बाज़ार अलग है

  4. अपनी जगह समझो - सस्ता, premium, या luxury?

  5. हकीकत से मेल खाने वाली योजना - नवाचार नहीं तो ऊंची शुरुआत नहीं

  6. दो जान-लेवा गलतियों से बचो - कम कीमत = धीरी मौत, ज्यादा कीमत = जल्दी मौत

  7. माया का सबक याद रखो - परोक्ष खर्चे असली खर्चे हैं, नज़रअंदाज़ मत करो

  8. जांचो और बदलो - पहली कीमत हमेशा की नहीं

  9. अपना मूल्य साफ बताओ - नहीं बताओगे तो महंगे लगोगे

  10. अलग हालत, अलग योजना - समझदारी से मिलाओ


आखिरी बात - दिल से

जैसे नेहा ने बुटीक आर्डर के लिए अपने हाथ से paint किए बैग की photos खींचीं, उसने अपनी यात्रा पर विचार किया।

"सबसे बड़ी सीख क्या थी जानती हो?" उसने मीरा को साप्ताहिक call पर बताया। "कीमत लगाना सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये एक फैसला है जो बताता है तुम कौन हो, किसे सेवा देते हो, और किसके लिए खड़े हो।"

"और," उसने हंसते हुए जोड़ा, "ये असली गणित पर आधारित होना चाहिए, कलात्मक आशावाद पर नहीं। शुक्रिया, माया, इतने खुले-आम वो cost calculation का सबक सीखने के लिए कि बाकियों को नहीं सीखना पड़ा!"

तीन बड़े सबक:

  1. लागत पहले, कीमत बाद - सभी खर्चे (सीधे + परोक्ष) जानो। फिर तय करो किस कीमत पर जीवित रह सकते हो। फिर देखो बाज़ार उस कीमत का समर्थन करता है या नहीं। अगर नहीं, तो या तो खर्चे कम करो या मूल्य बढ़ाओ - पर कभी आंखें बंद करके कम कीमत मत लगाओ।

  2. योजना हकीकत से मेल खानी चाहिए - खर्च-जोड़ छोटे धंधे के लिए। प्रीमियम pricing स्थापित brands के लिए। मूल्य-आधारित उनके लिए जो अपना अनोखा मूल्य साफ-साफ दिखा सकते हैं। बाज़ार प्रवेश उनके लिए जिनकी जेबें गहरी हैं। गलत योजना = आपदा!

  3. कीमत स्थिर नहीं - ये बढ़ती है - नेहा ने ₹1,499 से शुरू किया, ₹1,899 पर बढ़ी, और ₹2,299-2,499 तक जाने का plan है। जैसे-जैसे तुम्हारा brand बढ़ता है, अनुभव बढ़ता है, ग्राहक आधार मजबूत होता है, तुम्हारी कीमत भी बढ़नी चाहिए। पहली कीमत को पकड़ के मत बैठो!


तुम्हारी कहानी क्या है?

कीमत लगाना! 🎨💰

अब जाओ, अपने खर्चे निकालो, अपनी industry की खोज करो, अपनी जगह साफ करो, और अपनी सही कीमत ढूंढो। क्योंकि जब कीमत सही होती है, तो बाकी सब चीज़ें अपनी जगह आ जाती हैं।

तुम भी कर सकते हो! बस ईमानदारी से अपने हिसाब-किताब करो, अपने ग्राहकों को समझो, और धैर्य रखो। कीमत लगाना एक कला है जितना ये विज्ञान है - और हर कलाकार को अभ्यास चाहिए।

तुम्हारी कीमत लगाने की कहानी क्या है? माया की तरह कम कीमत लगा रहे हो और खुद को थकान तक काम करवा रहे हो? या नेहा की तरह शुरू में ज्यादा कीमत लगाई और सोच रहे हो कि ग्राहक क्यों नहीं खरीद रहे? टिप्पणियों में बताओ - हम सब एक-दूसरे की कीमत लगाने की यात्राओं से सीखते हैं!

पुनश्च अभी भी अपने खर्चों के बारे में पक्का नहीं हो? अभी एक कागज़ उठाओ और सब कुछ सूची बनाओ:

  • सीधी सामग्री

  • Packing

  • उपकरण टूट-फूट (लागत ÷ महीनों में जीवन)

  • Bills (बिजली, गैस, पानी)

  • Internet और subscriptions

  • Ads

  • Transport और delivery

  • Photography

  • Website

  • Insurance और license

  • हर कोई धंधे का खर्चा

महीने के खर्चे अपने उत्पादन से विभाजित करो। वो तुम्हारी असली लागत प्रति इकाई है। तभी तुम सही कीमत लगाने की योजना चुन सकते हो।


याद रखो: सही कीमत वो है जो:

  • तुम्हारा मूल्य दर्शाए

  • तुम्हारे सारे खर्चे (सीधे + परोक्ष) निकाले

  • टिकाऊ मुनाफा सुनिश्चित करे

  • तुम्हारे लक्षित बाज़ार की अपेक्षाओं से मेल खाए

वो सही बिंदु ढूंढो, और तुमने सफलता की विधि ढूंढ ली!

माया का सबक: अप्रत्यक्ष लागतें चूकने से वो गायब नहीं होतीं। वो चुपचाप व्यापार नष्ट करती रहती हैं।

- ये blog उन सभी छोटे कारोबारियों के लिए जो हर दिन मेहनत करते हैं, अपने सपनों का पीछा करते हैं। तुम अकेले नहीं हो - हम सब सीख रहे हैं, बढ़ रहे हैं, और एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। चलते रहो! आगे बढ़ते रहो! सफलता तुम्हारी है! 🌟

Get Notified When a New Story is Published!

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
Post: Blog2_Post

OMEMY

सदस्यता प्रपत्र

सबमिट करने के लिए धन्यवाद!

©2021 OMEMY द्वारा

bottom of page