टेक्सटाइल सर्कुलैरिटी (कपड़ों का बार-बार इस्तेमाल) कोई 21वीं सदी की नई खोज नहीं है। यह सदियों से दुनिया भर की शिल्प परंपराओं में शामिल तरीकों को फिर से खोजने जैसा है। जापान की बोरो पैचिंग और साशिको सिलाई, बंगाल की पुरानी साड़ियों की कई परतों से बनी कांथा रज़ाइयां, सिंध की राली रज़ाइयां, भारत के चिंदी गलीचे, पश्चिमी पैचवर्क रज़ाइयां, स्कैंडिनेवियाई रैग बुनाई, पनामा का मोला एप्लिक और साधारण सी रैग डॉल (कपड़े की गुड़िया)—ये सभी एक ही सोच के अलग-अलग सांस्कृतिक जवाब हैं: कपड़े के